विज्ञापनों में उलझते राजनीतिक दल

हमारे देश में 17वें लोकसभा का चुनाव है। सभी दल गरीबी, बेरोज़गारी, बढ़ते प्रदूषण, बढ़ती बीमारियां, न्याय प्रणाली की लचर व्यवस्था, शिक्षा के प्रति उदासीनता, सामान्य शिक्षा और बढ़ते अपराध जैसे बड़े मुद्दों से दूर भागते हैं। वर्तमान चुनाव में सभी राजनीतिक दलों द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए नए-नए तरीके अपनाएँ जा रहे हैं।

इस समय देश में अली-बजरंगबली, हिंदू-मुस्लिम, जैसे जातिगत और धार्मिक मुद्दों पर ज्वलंत बयान सामने आ रहे हैं। सभी दल इस चुनाव में अपने-अपने वादों से देश की जनता को लुभाने में लगे हैं। चाहे वह काँग्रेस की ‘न्याय योजना’ हो या भारतीय जनता पार्टी की धारा 370 हटाने की नीति हो या सपा की ‘अहीर रेजीमेंट’ की, इन योजनाओं की मौलिकता तो चुनाव संपन्न होने के बाद ही पता चलेगी।

मोदी सरकार ने विज्ञापन पर 5 सालों में किए 5000 करोड़ रुपए खर्च

इस चुनाव में वर्तमान केंद्र सरकार अपने प्रचार-प्रसार में पिछले पांच सालों में बहुत तरह के कार्य करने के दावे कर रही है लेकिन इन दावों की असलियत कुछ और ही है। वर्तमान सरकार ने करोड़ों रुपए तो पानी की तरह सिर्फ विज्ञापनों पर खर्च किए हैं।विज्ञापनों के मामले में यह खर्च केवल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रिंट मीडिया में भी विज्ञापन के लिए करोड़ों की राशि खर्च की है। वर्तमान सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, आधार और योग जैसी योजनाओं के प्रचार पर भी करोड़ों रूपए खर्च किए हैं। इन सब खर्चों में सबसे ज़्यादा राशि प्रिंट मीडिया के विज्ञापनों को दी गई है।

देश को विज्ञापन कि नहीं, समस्याओं के समाधान की जरूरत है। अगर बेरोज़गारी और शिक्षा पर सरकारें ध्यान नहीं देंगी तो एक दिन हमारे देश की जनता व्यवस्था के खिलाफ ऐसा बगावत करेगी जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।आज हमारा देश समृद्ध है। हमारे देश को शक्तिशाली बनाने के लिए अनावश्यक खर्च ना करके आवश्यक रूप से खर्च करने की ज़रूरत है। यदि राजनीतिक पार्टियां ध्यान दे तो हमारा देश दुनिया के शीर्ष देशों में से एक हो सकता है। अमेरिका, रूस जैसे देशों के राजनेता अपने-अपने देशों में बड़े ही रुचिकर रूप से विकास कर रहे हैं और हम उनकी नकल भी नहीं कर पा रहे हैं।सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, इन सब पर फिजूल धन फूंकने की ज़रूरत नहीं है। जन सहयोग बहुत बड़ी ताकत रखता है। उसी पर विचार करने की ज़रूरत है।सभी को एकजुट होकर बेरोज़गारी, भुखमरी जैसी बड़ी समस्याओं को खत्म करना होगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार की उचित व्यवस्था के लिए लड़ाई लड़नी होगी

” देश को विज्ञापन कि नहीं, समस्याओं के समाधान की जरूरत है”

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फेक न्यूज़ का बढ़ता जंजाल

save_20190429_1121595986543349862371196.jpegसोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ यानी फर्जी खबरें आज जिस आसानी से वायरल होती हैं और जिस तरह उनका सामाजिक, राजनैतिक, और आर्थिक दुरुपयोग होता है वह हमारे समय की हम समस्या बन गया है। झूट का यह कारोबार करने वाले कौन हैं और इससे निपटने के क्या तरीके हो सकते हैं? 50 साल से ज्यादा और 20 साल से कम उम्र के लोग फेक न्यूज़ से आसानी से प्रभावित हो जाते हैं।

झूठ का कारोबार

कॉरपोरेट कंपनियां अपने फायदे के लिए फेक न्यूज़ को इस्तेमाल कर रहे हैं। जैसे कोई दवा कंपनी उत्पाद की बिक्री बढ़ाने के लिए प्राकृतिक इलाज के बारे में भ्रामक खबरें फैला सकती है इसलिए ऐसी न्यूज़ से सतर्क रहना जरूरी है। बीते कुछ सालों में फेक न्यूज़ ने जितनी तेजी से अपनी पहुंच बनाई है उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। पार्टियों से लेकर कॉरपोरेट कंपनियों और आम लोगों तक, अपने फायदे के लिए फर्जी खबरें फैलाने में पीछे नहीं है।

फेक न्यूज़ दो तरह की होती हैं:- एक जो पूरी तरह झूठ होती है और दूसरी, जिन्हें आंशिक रूप से सच हो सकता है। फोटो और वीडियो झूठ को ज्यादा विश्वसनीय बनाकर पेश करते हैं और लोग आसानी से उस पर यकीन कर लेते हैं।

क्या है नुकसान

बहुत से लोगों को लगता है कि फेक न्यूज़ यानि फर्जी खबरों से आखिर उनका क्या नुकसान है लेकिन यह रवैया ठीक नहीं है आज थोड़े ही माध्यम से फैली फर्जी खबरें कई बार दंगे फसाद की वजह बन चुकी हैं फेक न्यूज़ लोगों की जीवनशैली से लेकर उनकी पसंद ना पसंद और अहम निर्णय तक को प्रभावित कर सकती हैं और यह कई मामलों में साबित भी हो चुका है। वर्ष 1475 मे इटली में एक खबर फैली यहूदियों ने 1 ईसाई बच्चे को मार डाला। इसके बाद बड़ी संख्या में यहूदियों की गिरफ्तारी हुई पर बात ने यह सोचना गलत निकली। हालांकि तब तक काफी नुकसान हो चुका था। अपना झूठी सूचनाओं इंटरनेट आने के बाद और प्रभावी तरीके से की जाने लगी आज ऐसी अफवाहों के फैलने की रफ्तार काफी तेज है, लिहाज़ा का खतरा भी ज्यादा है।

फेसबुक व्हाट्सएप हुए सतर्क

फेसबुक व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया मंच और गूगल जैसी कंपनियां फेक न्यूज़ के कारण हो रही उनकी किरकिरी के बाद इस मुद्दे पर सख्त हुए हैं। हाल ही में व्हाट्सएप ने फेक न्यूज़ और जानकारी फैलाने से रोकने के लिए फॉरवर्ड मैसेज को सीमित कर दिया है। अब यूजर एक मैसेज को एक बार में सिर्फ 5 लोगों को ही फॉरवर्ड कर सकेंगे। फेसबुक ने इसे रोकने के लिए समाचार संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने के बात कही है। कुछ समय पहले गूगल ने भी अपने सर्च इंजन में फैक्ट चैक टूल को जोड़ा है। यह सभी कंपनियां बीते दिनों कई जागरूकता कार्यशाला करती भी नजर आई।

भारत में फेक न्यूज़ को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। फेक न्यूज़ से बचने के लिए आपको खुद सगज रहना पड़ेगा। भारत में अब तक इस से जुड़ा कोई नियम नहीं बन पाया है, जबकि दूसरे देश नियम ला चुके हैं।

Tik Tok Banned Is Of No Use

Tik Tok, is an IOS and Android media app for creating and sharing vedios. It allows users to create short lip syncing vedios of 3-60 seconds.There are about 120 million active users in India. Many famous Tik Tok users as may not be as famous as big bollywood celebrities but they getting fan on the basis of their own acting skills. Top Indian Tik Tok stars like Jannat Jubair, Mohd. Faisal, Manjul Khattar, Awez Darbar, etc. These celebes are famous by this app.

Few days ago, Madras High Court lifted the ban on future download of Tik Tok app and in two days after announcement Tik Tok app has been absent from Google and Apple app stores and lost nearly 2 millions users .

But 120 million active monthly users weren’t affected by ban because court order only kept new costumers from downloading the app. It didn’t stop the use of the app for rest of the users.

Do you think Tik Tok app should be banned in India?

If my answer is ” NO” the reason is that honest people is working honestly on it.This app changed the lives of thousands of people.

If is “YES” because youth are getting addicted with this app. Other reason, people post anything without understand or thinking the fact such as nationalism, secularism, racialism, etc this is serious issue in India. So stop doing this we have many religion and languages, if trolls it will hurt many and start fighting and lot more.

“the future of the youngsters and mindset of the children are spoiled”

April Fool’s Day: ICC,OLA,MacDonald’s and other tried to fool us with Prank.

Prank which means a trick that is intended to be funny but not to cause harm or damage.Making fools of their customers is not something companies normally want to advertise.On April Fool’s Day, everyone’s business becomes funny business, and this year is bound to be different and hoping for that widely successful prank that goes viral.April Fool’s Day is a time when many companies con their costumers into believing the most unusual things.

April Fool’s Day: In 2017 , Lay’s announced a “no share pack” with fingerprint sensors on April 1

However, this day not just friends and families. It’s also a day when companies manage to con their costumers into believing the most unusual things.Back in 2009, American global travel technology company actually managed to convince some people that they were offering flight to Mars! and tickets starting at $99, it was a gag that went down in history as legendary.In 2017, Amazon announced ‘Petlexa’ – a speaking dogs, cats and other pets. The Petlexa feature allow dogs, cats and other animals to communicate with Alexa just like you do. In similar also in 2017, Google announced the launched ‘Google Play for Pets’, which they described as “a new category of games, apps and training tools to keep your pet stimulated”.

1)ICC:-

The International Cricket Council made a few changes to the rules in Test Cricket announcing them on April 1 would made them believable! Changes like the coin toss will be replaced by a Twitter poll, and if the temperature soars beyond 35 players will have the option to wear shorts and play.

2)MacDonald’s:-

One of our favourite fast food chain officially pranking us all on instagram. MacDonald’s got all the way into April Fool’s spirit by posting about it’s new “dipping sauces”,sipping cola, Hasbro, known for it’s iconic games and toys like monopoly, transformers and my little pony, created a new toy for all children. Ice-cream face mask, Dunkin’s doughnut cupholder, MacPickel.

3)OLA:-

The Indian Cab aggregator launched an online for “OLA Restrooms”-toilets om-the-go that can be booked via it’s app “Over the next six months, you can contribute Rs.1 towards this cause(sanitation) with every OLA ride”, it said in blogpost.

Kingfisher pulled a prank on April Fool’s Day by announcing kingfisher now anytime anywhere- with the Kingfisher Istant Beer mix.The announcement said ” all you need is water! Kingfisher has made this possible and now available for tasting. So good bye heavy walks homes with bulky filled with beers and no more fighting for space in the fridge forbeer bottle before the party.

This you see how many companies prank to the costumers specially on April fool’s day.

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